Sanjay Raut hits back over the Emergency; targets the opposition.
मुंबई: आपातकाल की बरसी पर शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय राउत ने एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर तीखा हमला बोला है। संजय राउत ने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का बचाव करते हुए कहा कि उन्होंने आपातकाल के दौरान कभी किसी राजनीतिक दल को नहीं तोड़ा था। राउत का यह बयान ऐसे समय में आया है जब हाल ही में शिवसेना (यूबीटी) के 9 लोकसभा सांसदों में से 6 सांसदों ने पाला बदलकर शिंदे गुट का दामन थाम लिया है। मुंबई में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए राउत ने दावा किया कि देश पिछले 12 सालों से अघोषित आपातकाल जैसी स्थिति का सामना कर रहा है।
संविधान में है आपातकाल का प्रावधान: संजय राउत
संजय राउत ने 1975 में देश में लागू किए गए आपातकाल के फैसले का खुलकर बचाव किया। उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान में आपातकाल लगाने का बकायदा स्पष्ट प्रावधान मौजूद है। राउत ने कहा, "इंदिरा गांधी ने न तो कोई राजनीतिक पार्टी तोड़ी थी और न ही देश के संविधान को खत्म किया था। अगर देश के भीतर अराजकता फैलती है, तो संविधान सरकार को आपातकाल लगाने का अधिकार देता है। इसका मतलब यह कतई नहीं है कि संविधान का सम्मान नहीं किया गया।" उन्होंने सवाल उठाते हुए आगे कहा कि अगर नोटबंदी लागू की जा सकती है और कोविड-19 महामारी के दौरान कड़े प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं, तो उस समय के फैसले पर सवाल क्यों? उन्होंने याद दिलाया कि शिवसेना प्रमुख बालासाहेब ठाकरे ने भी उस समय आपातकाल का समर्थन किया था।
एनसीईआरटी की नई किताब में आपातकाल का पाठ
इसी बीच, नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (NCERT) ने कक्षा 9 की सामाजिक विज्ञान की नई किताब में 1975 के आपातकाल को शामिल किया है। 'अंडरस्टैंडिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड' नाम की इस नई पाठ्यपुस्तक में आपातकाल को भारतीय लोकतंत्र के सामने आई सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक के रूप में पढ़ाया जाएगा। किताब के इस अध्याय में बताया गया है कि आपातकाल के उस दौर में देश के नागरिकों के ज्यादातर मौलिक अधिकारों को सस्पेंड (निलंबित) कर दिया गया था।
सचिन पायलट ने सरकार पर साधा निशाना
दूसरी तरफ, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सचिन पायलट ने भी इस मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरा है। उन्होंने एनसीईआरटी के इस कदम की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि भाजपा जब भी केंद्र या किसी राज्य की सत्ता में आती है, तो वह इतिहास को अपने नजरिए और सहूलियत से पेश करने की कोशिश करती है। पायलट ने कहा कि आजाद भारत के इतिहास में लोकतंत्र के सामने आज जैसी चुनौती पहले कभी नहीं देखी गई। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार मीडिया, सोशल मीडिया, न्यायपालिका, नौकरशाही और चुनाव आयोग जैसी स्वतंत्र संस्थाओं का दुरुपयोग करके विपक्ष और जनता की आवाजों को दबाने का काम कर रही है, जो कि अभूतपूर्व है।
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