प्रदूषण से निपटने की तैयारी, 22 तकनीकों पर शुरू हुआ ट्रायल
नई दिल्ली। प्रदूषण से निपटने के लिए दिल्ली सरकार ने नई तकनीकों का सहारा लेना शुरू कर दिया है। इनोवेशन चैलेंज के तहत चुनी गई 22 तकनीकों पर ट्रायल अब शुरू किए जा रहे हैं। इस दिशा में सोमवार को पर्यावरण एवं वन मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा की अध्यक्षता में बैठक की गई। उसमें डीटीसी, एनडीएमसी, एमसीडी, डीएफएस, डीटीआईडीसी और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी शामिल हुए। बैठक में निर्देश दिए गए कि इन तकनीकों के ट्रायल में किसी तरह की देरी नहीं होनी चाहिए। सभी एजेंसियों को जगह देने, बिजली कनेक्शन उपलब्ध कराने और जरूरी अनुमति देने जैसे काम तुरंत पूरे करने को कहा गया। मंत्री ने साफ कहा कि हर विभाग सिर्फ मदद देने की न सोचे, बल्कि दिल्ली की हवा को बेहतर बनाने के लिए इसे मिशन के तौर पर ले।
ट्रायल के लिए 22 तकनीकें चुनी गईं
इस इनोवेशन चैलेंज में देशभर से आई 284 एंट्री में से 22 तकनीकों को ट्रायल के लिए चुना गया है। इनमें 13 तकनीकें वाहनों से निकलने वाले प्रदूषण को कम करने पर केंद्रित हैं, जैसे रेट्रोफिट एमिशन कंट्रोल डिवाइस, एयर फिल्टर और डस्ट कलेक्टर। वहीं 9 समाधान वातावरण में मौजूद धूल और कणों को कम करने के लिए हैं, जिनमें बड़े एयर प्यूरीफायर, एयर ट्रीटमेंट टावर और रोड डिवाइडर पर लगने वाले डस्ट कलेक्टर शामिल हैं।
इन जगहों पर होने हैं ट्रायल
इन तकनीकों को आईएसबीटी कश्मीरी गेट, लाल किला, फायर स्टेशन, हेल्थ सेंटर और पंजाबी बाग, कीर्ति नगर, रोहिणी जैसे इलाकों में लगाया जाएगा। हर तकनीक के ट्रायल पर सरकार करीब 10 लाख रुपये तक खर्च कर सकती है। साथ ही बेहतर प्रदर्शन करने वालों को 50 लाख, 25 लाख और 10 लाख रुपये तक के पुरस्कार भी दिए जाएंगे।
जुलाई में आएगी फाइनल रिपोर्ट
इन ट्रायल्स की निगरानी आईआईटी दिल्ली, नेशनल फिजिकल लेबोरेटरी (एनपीएल) और इंटरनेशनल सेंटर फॉर ऑटोमोटिव टेक्नोलॉजी (आईकैट) करेंगे। 30 से 90 दिन के भीतर डाटा जुटाया जाएगा, मई के अंत तक रिपोर्ट तैयार होगी और जुलाई तक सरकार को अंतिम रिपोर्ट दी जाएगी।
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