​ *6 बजे तक कलेक्टर, उसके बाद 'पी..एम'!*
​नारायण-नारायण प्रभु! मध्य प्रदेश की धरती जहां एक ओर भीषण गर्मी से तप रही है, वहीं दूसरी ओर सीधी भर्ती के एक आईएएस  अधिकारी के व्यवहार ने आम जन को और अधिक तपा दिया है। दरअसल प्रभु, यह साहब हाल ही में एक छोटे से जिले से प्रमोट होकर एक बड़े जिले के कलेक्टर बने हैं। कलेक्टरी संभालते ही वे जबरदस्त एक्शन में नजर आए। कार्यभार ग्रहण करते ही उन्होंने मातहत अधिकारियों के साथ बैठकों का दौर शुरू किया और जिले के कई क्षेत्रों का तूफानी दौरा भी कर डाला। उनके इस तेवर से आम जनता को वे 'भले मानुष' नजर आने लगे और लोगों की अपेक्षाएं भी बढ़ गईं।
​किंतु प्रभु, फिर अचानक साहब ने ऐसी पलटी मारी कि आम जनता के फोन उठाना और मिलना तक बंद कर दिया। जब कुछ लोगों ने साहस जुटाकर पूछा कि "साहब, आप न फोन उठा रहे हैं और न ही मिल रहे हैं," तो साहब ने दो टूक शब्दों में कह दिया— "मैं शाम 6 बजे तक ही कलेक्टर हूं, उसके बाद 'पी.एम.'  हूं।" अब 6 बजे के बाद वे किसका फोन उठाएं और किससे मिलें, यह उनकी मर्जी है। धन्य हैं साहब और धन्य है उनकी ये 'प्राइवेट' कलेक्टरी!
​ *साहब के लिए 'स्पेशल' खानसामा*
​प्रभु, अगला समाचार पुलिस के गलियारों से सुनाई दे रहा है। सुनने में आया है कि एक तेजतर्रार आईपीएस  अधिकारी हाल ही में स्थानांतरित होकर एक बड़े जिले में ऊंचे पद पर आए हैं। अपनी योग्यता और क्षमता का लोहा मनवा चुके इन साहब ने आते ही जनता के बीच पैठ बनाना शुरू कर दिया और कम समय में ही खासे लोकप्रिय हो गए। किंतु प्रभु, उनकी कार्यप्रणाली से जिले की पुलिस कुछ दुखी नजर आने लगी है।
​खैर, यह तो हुई ड्यूटी की बात, अब बात करते हैं साहब के जायके की। चर्चा है कि साहब स्वादिष्ट व्यंजनों के बेहद शौकीन हैं। इस शौक को पूरा करने के लिए 35 हजार की भारी-भरकम पगार पर एक विशेष खानसामा रखा गया है। सुना है प्रभु, यह खानसामा हर प्रकार के लजीज व्यंजन बनाने में निपुण और दक्ष है। यह अलग बात है कि इस 'स्पेशल' खानसामे को खोजने में जिले के एक मातहत अधिकारी को दिन-रात एक करना पड़ गया। अब पुलिस का काम सुरक्षा करना है या स्वाद सुधारना, यह तो नारायण ही जानें!
​ *माननीय ले सकते हैं बड़ा निर्णय!*
​प्रभु, अब राजनीति की बात। कांग्रेस छोड़कर भाजपा का दामन थामने वाले एक पूर्व मंत्री और वर्तमान विधायक पिछले कुछ समय से बहुत दुखी और परेशान नजर आ रहे हैं। सार्वजनिक मंचों से कई बार वे अपना दर्द छलका चुके हैं। राजनैतिक गलियारों में चर्चा है कि ये 'माननीय' जल्द ही कोई बड़ा उलटफेर या निर्णय ले सकते हैं। सुना है कि इस बारे में वे अपने समर्थकों और निकटस्थ लोगों से गहन विचार-विमर्श भी कर चुके हैं।
​दरअसल प्रभु, इन माननीय ने जिन 'आका' के भरोसे भाजपा का झंडा उठाया था, अब उन्हीं आका ने उन्हें नजरअंदाज करना शुरू कर दिया है। अब उन्हें डर सताने लगा है कि अगली बार टिकट मिलेगा भी या नहीं। अपने राजनैतिक भविष्य को डूबता देख वे अब नई राह तलाश रहे हैं।
​तो प्रभु, ये थे वे समाचार जो इन दिनों मध्य प्रदेश के प्रशासनिक, पुलिस और राजनैतिक गलियारों में तैर रहे हैं। अब आज्ञा दीजिए प्रभु, शीघ्र वापस आऊंगा नए समाचारों के साथ...
​नारायण-नारायण!

न्यूज़ सोर्स : Naradmunilive