ईंधन बचत और परंपरा का अनोखा संगम देखने को मिला नारायणपुर में
नारायणपुर: सादगी की मिसाल—महंगी कारों को छोड़ बैलगाड़ी पर सवार होकर दुल्हन लेने पहुंचा पुलिस का जवान
नारायणपुर। आज के दौर में जहाँ शादियों में महंगी गाड़ियों और भारी दिखावे का चलन बढ़ गया है, वहीं छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले से परंपरा और सादगी की एक बेहद खूबसूरत तस्वीर सामने आई है। जिले के डूमरतराई गांव के रहने वाले कुबेर देहरी ने अपनी शादी को यादगार बनाने के लिए आधुनिक वाहनों के बजाय बैलगाड़ी को चुना। नारायणपुर पुलिस विभाग में एसपी गनमैन के पद पर तैनात कुबेर की यह अनोखी बारात अब पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है।
पर्यावरण और परंपरा का अनूठा मेल
कुबेर देहरी ने ईंधन की बचत और पर्यावरण संरक्षण का बड़ा संदेश देते हुए डीजल-पेट्रोल से चलने वाली गाड़ियों का त्याग किया। उन्होंने सजी-धजी बैलगाड़ी पर सवार होकर बारात निकाली। कुबेर का मानना है कि भारतीय संस्कृति और ग्रामीण परंपराएं ही हमारी असली पहचान हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की सादगी और बचत की अपील से प्रेरित होकर उन्होंने अपनी जड़ों की ओर लौटने का यह फैसला लिया, ताकि नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति सहेजने की प्रेरणा मिल सके।
गांव में दिखा पुरानी संस्कृति का नजारा
जब सजी हुई बैलगाड़ियों का काफिला गांव की गलियों से गुजरा, तो हर कोई ठिठक कर देखने लगा। ग्रामीणों ने इस पहल की मुक्त कंठ से सराहना की। गांव के बुजुर्गों का कहना है कि दशकों पहले इसी तरह बारातें निकला करती थीं, और आज एक बार फिर वही पुरानी झलक देखकर मन खुश हो गया। लोगों ने इसे फिजूलखर्ची के खिलाफ एक सशक्त कदम बताया है।
मंत्री केदार कश्यप ने भी दी शाबाशी
इस सादगी भरे विवाह की चर्चा सोशल मीडिया तक भी पहुँची। कैबिनेट मंत्री केदार कश्यप ने भी इस पहल की सराहना करते हुए इसे भारतीय संस्कृति और सामाजिक जागरूकता का उत्कृष्ट उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि इस तरह के प्रयास समाज को एक नई और सकारात्मक दिशा देने का काम करते हैं।
क्षेत्र में बनी मिसाल
नारायणपुर की यह बैलगाड़ी वाली बारात अब एक मिसाल बन चुकी है। लोग इसे केवल एक शादी नहीं, बल्कि पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी और अपनी संस्कृति के प्रति सम्मान के रूप में देख रहे हैं। इस अनोखे विवाह ने साबित कर दिया कि सादगी में ही असली सुंदरता और संस्कार छिपे होते हैं।
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