हवाई जहाज को उडाने में यूज होता है हजारों लीटर जेट फ्यूल
नई दिल्ली। क्या आपने कभी सोचा है कि हवाई जहाज में पेट्रोल या डीजल में से क्या भरा जाता है। दरअसल, बड़े कमर्शियल विमानों में न तो पेट्रोल और न ही डीजल का इस्तेमाल होता है। इनमें जेट फ्यूल का उपयोग किया जाता है, जो केरोसीन का परिष्कृत रूप होता है। इसमें विशेष एडिटिव्स मिलाए जाते हैं ताकि यह बेहद ठंडे तापमान, यहां तक कि -40 डिग्री सेल्सियस से नीचे भी न जमे और इंजन में आसानी से जल सके। छोटे पिस्टन इंजन वाले विमानों में एविएशन गैसोलीन (अवगास) का उपयोग होता है, जो पेट्रोल जैसा होता है, लेकिन बड़े जेट विमान आमतौर पर जेट-ए या जेट-ए1 फ्यूल पर ही चलते हैं। विमानों में ईंधन भरने की प्रक्रिया भी बेहद जटिल और सुरक्षित होती है। एयरपोर्ट पर विशेष फ्यूल ट्रकों या पाइपलाइन सिस्टम के जरिए टंकियों को भरा जाता है, जिसमें सख्त सुरक्षा मानकों का पालन किया जाता है, क्योंकि जेट फ्यूल अत्यधिक ज्वलनशील होता है। एक बड़े विमान की टंकी पूरी तरह भरने में कई घंटे लग सकते हैं। मौजूदा वैश्विक संकट के कारण एयरलाइंस कंपनियों पर दबाव बढ़ गया है। कई कंपनियों ने उड़ानों की संख्या घटा दी है, जबकि कुछ ने टिकटों के दाम बढ़ा दिए हैं। जेट फ्यूल की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर यात्रियों की जेब पर पड़ रहा है। वहीं कुछ एयरलाइंस अब सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल (एसएएफ) की ओर रुख कर रही हैं, जो पर्यावरण के अनुकूल विकल्प है, हालांकि यह अभी महंगा और सीमित मात्रा में उपलब्ध है।
आमतौर पर लोग अपनी बाइक या कार की टंकी भरवाकर काम चला लेते हैं, लेकिन एक विमान की टंकी भरने में लाखों लीटर ईंधन की जरूरत पड़ सकती है। छोटी और मध्यम दूरी की उड़ानों में इस्तेमाल होने वाले विमान जैसे बोइंग 737 और एयरबस ए320 की टंकी में करीब 23,000 से 27,000 लीटर जेट फ्यूल भरा जा सकता है। सामान्य घरेलू उड़ानों के लिए लगभग 20,000 से 25,000 लीटर ईंधन पर्याप्त होता है। वहीं लंबी दूरी के विमानों की क्षमता इससे कहीं अधिक होती है। दुनिया के सबसे बड़े यात्री विमान एयरबस ए 380 में करीब 3,20,000 लीटर ईंधन भरा जा सकता है। इसी तरह बोइंग 747-8 में लगभग 2,38,000 लीटर, बोइंग 747-400 में करीब 2,16,000 लीटर और बोइंग 777 में लगभग 1,80,000 लीटर तक ईंधन की क्षमता होती है। एक बड़े विमान में प्रति घंटे 5,000 से 12,000 लीटर तक ईंधन की खपत हो सकती है, जो उड़ान की दूरी, वजन, मौसम और ऊंचाई पर निर्भर करती है। मालूम हो कि यूएस-ईरान युद्ध के कारण वैश्विक स्तर पर जेट फ्यूल की कीमतों में भारी उछाल देखने को मिल रहा है, जिसका असर भारत सहित कई देशों पर पड़ा है।
1 अप्रैल 2026 से दिल्ली में एविएशन टर्बाइन फ्यूल (एटीएफ) की कीमत बढ़कर रुपए 2.07 लाख प्रति किलोलीटर तक पहुंच गई, जो पिछले महीने के मुकाबले दोगुने से अधिक है। हालांकि, केंद्र सरकार ने स्थिति को देखते हुए घरेलू एयरलाइंस को राहत देने के लिए एटीएफ की बढ़ोतरी को 25 प्रतिशत तक सीमित कर दिया है। पेट्रोलियम और नागरिक उड्डयन मंत्रालय के बीच हुई चर्चा के बाद यह फैसला लिया गया, जिससे घरेलू उड़ानों के लिए प्रभावी कीमत करीब रुपए 1,04,927 प्रति किलोलीटर रह गई है। तेल आपूर्ति पर असर पड़ने से दुनियाभर में पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ रहे हैं और कई जगहों पर किल्लत की स्थिति भी बनने लगी है। ऐसे में विमानन क्षेत्र पर इसका सीधा प्रभाव पड़ रहा है, क्योंकि हवाई जहाजों में ईंधन की खपत बेहद अधिक होती है।
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