युवा विधायकों की भूमिका पर मंथन: लोकतंत्र सुदृढ़ करने और ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य पर जोर
भोपाल, 30 मार्च 2026।
मध्यप्रदेश विधानसभा परिसर स्थित विधान परिषद् हॉल में आज कॉमनवेल्थ पार्लियामेंट्री एसोसिएशन इंडिया रीजन, ज़ोन-6 के अंतर्गत आयोजित ‘युवा विधायक सम्मेलन’ में लोकतंत्र को मजबूत करने और ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य में युवा जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर व्यापक चर्चा हुई। कार्यक्रम की अध्यक्षता मध्यप्रदेश विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर ने की।


अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में श्री तोमर ने कहा कि लोकतंत्र केवल एक व्यवस्था नहीं, बल्कि नागरिकों की स्वतंत्रता, समानता, न्याय और बंधुता की भावना से सशक्त एक जीवंत प्रणाली है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती नागरिकों की सक्रिय भागीदारी पर निर्भर करती है और इसमें युवा विधायकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
संविधान के प्रति निष्ठा का संदेश
उन्होंने 25 नवंबर 1949 को संविधान सभा में दिए गए भीमराव अंबेडकर के ऐतिहासिक वक्तव्य का उल्लेख करते हुए कहा कि संविधान की सफलता उसे लागू करने वाले लोगों की निष्ठा पर निर्भर करती है। यदि जनप्रतिनिधि संविधान के प्रति प्रतिबद्ध रहेंगे, तो लोकतंत्र सुदृढ़ रहेगा।
युवाओं की बढ़ती भूमिका पर बल
श्री तोमर ने कहा कि भारत विश्व का सबसे युवा लोकतंत्र है, लेकिन राजनीति में युवाओं की भागीदारी अभी भी अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंची है। उन्होंने कहा कि पहली लोकसभा में 30 वर्ष से कम आयु के लगभग 26 प्रतिशत सदस्य थे, जबकि आज यह अनुपात घटा है। ऐसे में युवा विधायकों का दायित्व और भी बढ़ जाता है कि वे नीति-निर्माण से लेकर क्रियान्वयन और निगरानी तक सक्रिय भूमिका निभाएं।


उन्होंने कहा कि युवा विधायक शिक्षा, स्वास्थ्य, जलवायु परिवर्तन, उद्योग और सामाजिक समरसता जैसे विषयों पर आधुनिक और नवाचारी दृष्टिकोण ला सकते हैं। जातिवाद, नशाखोरी और लैंगिक भेदभाव जैसी कुरीतियों के विरुद्ध युवाओं की नेतृत्व क्षमता समाज को नई दिशा दे सकती है।
‘विकसित भारत 2047’ में युवाओं का योगदान
कार्यक्रम में ‘विकसित भारत 2047 – युवा विधायकों के दायित्व एवं चुनौतियां’ विषय पर चर्चा करते हुए श्री तोमर ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की उस सोच का उल्लेख किया जिसमें युवाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने पर बल दिया गया है। उन्होंने बताया कि राजनीति में नई ऊर्जा और पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से युवाओं को आगे आने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
उन्होंने चुनाव कानून (संशोधन) विधेयक, 2021 का उल्लेख करते हुए बताया कि अब 18 वर्ष की आयु प्राप्त करने वाले नागरिक वर्ष में चार बार मतदाता सूची में पंजीकरण करा सकते हैं, जिससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया में युवाओं की भागीदारी आसान हुई है।
विधानसभा की पहलें
मध्यप्रदेश विधानसभा द्वारा उठाए गए कदमों की जानकारी देते हुए अध्यक्ष ने बताया कि 16वीं विधानसभा के आरंभ से ही पहली बार निर्वाचित विधायकों को शून्यकाल में प्राथमिकता देने और उनके प्रश्नों को उसी दिन स्वीकार करने की व्यवस्था की गई है। साथ ही प्रश्न पूछने वाले सदस्यों को कार्यकाल समाप्त होने के बाद भी उत्तर उपलब्ध कराने की व्यवस्था लोकतांत्रिक विश्वास को सुदृढ़ करती है।
संसदीय ज्ञान पर जोर
उन्होंने युवा विधायकों से आग्रह किया कि वे संसदीय प्रक्रियाओं का गहन अध्ययन करें, प्रश्नकाल और शून्यकाल में सक्रिय भागीदारी निभाएं तथा वरिष्ठ सदस्यों से मार्गदर्शन प्राप्त करें। सदन के पोर्टल और ई-प्रशिक्षण संसाधनों का उपयोग कर वे अपनी भूमिका को अधिक प्रभावी बना सकते हैं।
अंत में श्री तोमर ने विश्वास व्यक्त किया कि सम्मेलन में हुए विचार-विमर्श और संकल्प देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को और अधिक सशक्त बनाएंगे तथा आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत सिद्ध होंगे।
राजनीति में विनम्रता, मर्यादा और अनुशासन आवश्यक : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
बगावत बर्दाश्त नहीं’ – टिकट विवाद पर Mamata Banerjee सख्त
बिहार को बनाएंगे देश का नंबर-1 प्रदेश – Nishant Kumar की पहली प्रतिक्रिया
एमएसएमई इकाइयां औद्योगिक गतिविधियों का प्रभावी केन्द्र और लाखों परिवारों के स्वावलंबन का हैं आधार : मुख्यमंत्री डॉ. यादव