*बालाघाट में शासकीय धान की हेराफेरी का बड़ा खुलासा हुआ है। EOW ने सचदेव राइस मिल के संचालकों और मार्कफेड-नागरिक आपूर्ति निगम के 6 अधिकारियों के खिलाफ करोड़ों के घोटाले का मामला दर्ज किया है। जानिए कैसे ट्रकों की 'नींद' ने खोला भ्रष्टाचार का राज।*
​​बालाघाट। मध्यप्रदेश के बालाघाट जिले में करोड़ों रुपये के शासकीय धान घोटाले का मामला गरमा गया है। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए मार्कफेड (MARKFED) और नागरिक आपूर्ति निगम (NAN) के तत्कालीन व वर्तमान अधिकारियों सहित राइस मिल संचालकों के विरुद्ध धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार का मामला दर्ज किया है।
​ *ऐसे खुला भ्रष्टाचार का 'काला खेल'*
​घोटाले की शुरुआत 2 अप्रैल 2024 को हुई, जब सचदेव राइस मिल से अवैध रूप से धान लेकर महाराष्ट्र जा रहे दो ट्रकों को अंतरराज्यीय चेक पोस्ट रजेगांव पर पकड़ा गया। पकड़े जाने पर ड्राइवर ने अजीबोगरीब बहाना बनाया कि उसे 'नींद' आ गई थी, इसलिए वह रास्ता भटक गया। मार्कफेड के अधिकारियों ने मामले को रफा-दफा करने के लिए महज 25-25 हजार का जुर्माना लगाया, लेकिन EOW की जांच में चौंकाने वाली सच्चाई सामने आई।

​ *कैसे किया गया घोटाला?*
​क्षमता का फर्जीवाड़ा: मिल की क्षमता 4 मीट्रिक टन थी, लेकिन अधिकारियों ने सांठगांठ कर इसे 6 मीट्रिक टन दिखाकर ज्यादा धान आवंटित किया।
​बिजली की खपत में खेल: जांच में पाया गया कि मिलिंग के लिए जितनी बिजली लगनी चाहिए थी, उससे आधी दिखाई गई। यानी धान मिलिंग के बजाय सीधे खुले बाजार (महाराष्ट्र/छत्तीसगढ़) में बेचा गया।
​बिना सत्यापन भुगतान: बिना गेट पास, तौल पर्ची और फास्टैग रिकॉर्ड के ही अधिकारियों ने 2.79 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया।
​किरायानामा का ड्रामा: मिल मालिक ने अपने ही बेटे को 100 रुपये के स्टाम्प पर मिल किराए पर दे रखी थी और एक ही बिजली कनेक्शन से दो मिलें चल रही थीं।

 


*इन धाराओं मे हुआ मामला दर्ज*
​BNS 2023 की धाराएं: 316(5), 338, 336(3), 340(2), 318(4), 61(2)
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 2018: धारा 7(सी), 13(1)ए, 13(2) के तहत आरोपियों पर मामला दर्ज किया गया है

न्यूज़ सोर्स : Naradmunilive