सिवनी: मेडिकल कॉलेज के नाम पर ₹4.66 करोड़ की बड़ी धोखाधड़ी, EOW ने जालसाज को दबोचा
सिवनी। मध्य प्रदेश आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) ने सिवनी जिले में एक सनसनीखेज धोखाधड़ी का खुलासा किया है। आरोपी ने नवनिर्मित शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय (GMC), सिवनी के नाम का दुरुपयोग कर दो व्यापारियों से 4 करोड़ 66 लाख 68 हजार रुपये की ठगी की है। EOW ने आरोपी स्पर्श अग्रवाल उर्फ अंकुर अग्रवाल के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
सरकारी नाम का सहारा लेकर बुना ठगी का जाल
जांच में सामने आया कि आरोपी स्पर्श अग्रवाल ने बेहद शातिराना तरीके से ठगी की योजना बनाई थी। उसने खुद को कॉलेज प्रशासन का करीबी और अधिकृत व्यक्ति बताया। उसने व्यापारियों को विश्वास दिलाया कि वह कॉलेज परिसर में दुकानों की नीलामी और छात्र मेस (Mess) में फूड सप्लाई का ठेका दिलवा सकता है।
फर्जी बैंक खाता बना 'ट्रम्प कार्ड'
धोखाधड़ी को अंजाम देने के लिए आरोपी ने HDFC बैंक की सिवनी शाखा में “G.M.C. Seoni” के नाम से एक निजी प्रोपराइटरशिप खाता खुलवाया। यह नाम सरकारी मेडिकल कॉलेज से मिलता-जुलता था, जिससे पीड़ितों को लगा कि वे पैसा सीधे सरकारी खाते में जमा कर रहे हैं।
पीड़ित सुयश अग्रवाल: अनाज व्यापारी सुयश से दुकानों की नीलामी के नाम पर ₹4.21 करोड़ हड़पे गए।
पीड़ित राम कुमार सुहाने: होटल व्यवसायी राम कुमार से मेस सप्लाई और सुरक्षा निधि के नाम पर ₹45.03 लाख की ठगी की गई।
शेयर बाजार में उड़ाए ठगी के पैसे
EOW की जांच में खुलासा हुआ कि "G.M.C. Seoni" के खाते में जैसे ही व्यापारियों का पैसा आता था, आरोपी उसे तुरंत अपने व्यक्तिगत खातों (HDFC और IDFC) में ट्रांसफर कर लेता था। बैंक स्टेटमेंट के विश्लेषण से पता चला कि आरोपी ने इस पूरी राशि का उपयोग Zerodha App के माध्यम से शेयर ट्रेडिंग में कर दिया।
कॉलेज प्रबंधन ने झाड़ा पल्ला
GMC सिवनी के अधिष्ठाता (Dean) ने लिखित रूप में स्पष्ट किया है कि:
कॉलेज में वर्ष 2024-25 में दुकानों की कोई नीलामी नहीं हुई।
कॉलेज की मेस छात्र स्वयं सहकारी (Co-operative) आधार पर चलाते हैं, इसमें कॉलेज का कोई हस्तक्षेप नहीं है।
आरोपी द्वारा दिखाए गए निविदा पत्र और दस्तावेज पूरी तरह फर्जी (कूटरचित) हैं।
इन धाराओं में दर्ज हुआ मामला
EOW ने आरोपी के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की निम्नलिखित धाराओं के तहत प्रकरण पंजीबद्ध किया है:
धारा 318(4): धोखाधड़ी (Cheating)
धारा 338: मूल्यवान संपत्ति के संबंध में कूटरचना
धारा 336(3): दस्तावेजों की कूटरचना
धारा 340(2): कूटरचित दस्तावेजों का असली के रूप में उपयोग
अधिकारी का कथन: "आरोपी ने सरकारी संस्थान की प्रतिष्ठा का लाभ उठाकर व्यापारियों को भ्रमित किया। मामले की विस्तृत विवेचना जारी है और जल्द ही अन्य साक्ष्यों के आधार पर अग्रिम वैधानिक कार्यवाही की जाएगी।"
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