9 साल की देरी के बाद प्रमोशन, वायंगणकर की कहानी चर्चा में
भोपाल। प्रदेश में पदस्थ आईपीएस अधिकारियों को 31 दिसंबर की शाम प्रमोशन का न्यू ईयर गिफ्ट मिला है. बुधवार को जारी हुई सूची में निरंजन वायंगणकर भी डीआईजी से प्रमोट होकर आईजी बन गए हैं. महाराष्ट्र डेप्युटेशन के बाद उनका सीआर खराब हुआ, जिसके चलते वे अपने साथी आईपीएस अधिकारियों से 9 साल पीछे हो गए. उनके बैचमेट एडीजी बन चुके हैं. निरंजन बी वायंगणकर आखिर डीआईजी से पदोन्नत होकर आईजी बन गए।
वायंगणकर 1999 बैच के अधिकारी हैं
आईजी के पद पर 9 साल बाद पदोन्नति मिली है. वे वर्ष 1999 बैच के आईपीएस अफसर हैं, जबकि उनके बैच की दीपिका सूरी और राकेश गुप्ता अब अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक के पद तक पहुंच गए है. वायंगणकर पिछले कई सालों से अपने खराब सीआर के कारण पदोन्नति नहीं पा सके थे. इधर पांच जिलों के पुलिस अधीक्षक सहित 6 आईपीएस अफसरों को कनिष्ठ प्रशासनिक ग्रेड सशर्त दी गई है. एसपी गुना अंकित सोनी, नीमच एसपी अंकित जायसवाल, विदिशा एसपी रोहित काशवानी, देवास एसपी पुनीत गेहलोद, खरगौन एसपी रविंद्र वर्मा और 15वीं वाहिनी की कमांडेंट हितिका वासल को कनिष्ठ प्रशासनिक ग्रेड वेतन इस शर्त के साथ के स्वीकृत किया गया है कि वे अगले सत्र में बिना किसी छूट के मिड कैरियर ट्रैनिंग फेस तीन में अनिवार्य रूप से शामिल हों।
पंकज श्रीवास्तव को सीआईडी की जिम्मेदारी
पंकज श्रीवास्वत को सीआईडी की भी जिम्मेदारी स्पेशल डीजी पंकज श्रीवास्तव को सीआईडी के स्पेशल डीजी का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है. सीआईडी में पदस्थ स्पेशल डीजी पवन कुमार श्रीवास्तव 31 दिसंबर को रिटायर हो गए। उनकी जगह पर पंकज श्रीवास्तव को पदस्थ किया गया है. पंकज श्रीवास्तव एंटी नक्सल अभियान के विशेष पुलिस महानिदेशक है. उनके पास एसटीएफ का भी अतिरिक्त प्रभार है।
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