*1 जनवरी को सजेगी इंदौर में शायरी की महफिल*
इंदौर ! अक्सर माना जाता है कि खाकी वर्दी और पुलिस की सख्त ड्यूटी इंसान के भीतर की कोमलता को कहीं दबा देती है, लेकिन मध्य प्रदेश के पूर्व पुलिस महानिरीक्षक (IG) महेंद्र सिंह सिकरवार इस धारणा को पूरी तरह गलत साबित करते हैं। दशकों तक कानून व्यवस्था को सुदृढ़ करने और समाज में न्याय की लौ जलाए रखने के बाद, आज वे अपनी शायरी के ज़रिए दिलों को जोड़ने का काम कर रहे हैं।

​सिकरवार साहब का पुलिस करियर साहस और ईमानदारी की मिसाल रहा है। उन्होंने मध्य प्रदेश के विभिन्न जिलों में चुनौतीपूर्ण भूमिकाएँ निभाईं। उनकी पुलिसिंग की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि उन्होंने हमेशा 'अपराध से घृणा, अपराधी से नहीं' के सिद्धांत को सर्वोपरि रखा। एक कड़क अधिकारी के रूप में उन्होंने जितनी मुस्तैदी से कानून का पालन कराया, उतनी ही संवेदनशीलता से उन्होंने आम जनमानस की समस्याओं को सुना।
​2. शायरी: रूह की आवाज़
​वर्दी उतारने के बाद जब उन्होंने कलम उठाई, तो उनकी शायरी में वही सादगी और सच्चाई नज़र आई जो उनके काम में थी। उनकी गज़लों में जीवन का फलसफा और उम्मीद की किरण दिखाई देती है। जैसा कि उनके इस शेर से झलकता है:
​"कुछ भी हो रिश्ता ए उम्मीद ना छोड़ा जाए,
जो ना हो खुद से वो तक़दीर पे छोड़ा जाए ...."
​यह शेर सिर्फ शायरी नहीं, बल्कि उनके जीवन का अनुभव है। उनकी रचनाएं जटिल नहीं होतीं, बल्कि सीधे दिल पर दस्तक देती हैं। वफ़ा, मोहब्बत और मानवीय रिश्तों की बारीकियों को वे बड़े ही 'नर्म और नाज़ुक' अंदाज़ में पिरोते हैं।


​​1 जनवरी 2026 को इंदौर के आनंद मोहन माथुर ऑडिटोरियम में होने वाला यह मुशायरा ऐतिहासिक होगा। जब मंच पर शकील आज़मी, सलीम सिद्दीकी और अनवर कमाल जैसे देश के दिग्गज शायर मौजूद होंगे, तब महेंद्र सिंह सिकरवार की मौजूदगी वहां एक अलग ही गरिमा पैदा करेगी। यह देखना दिलचस्प होगा कि जिस शख्स ने सालों तक मंचों की सुरक्षा व्यवस्था संभाली, आज वही अपनी नज़्मों से महफ़िल लूटने आ रहा है।

न्यूज़ सोर्स : Naradmunilive