इंदौर में 22.88 करोड़ का बैंक लोन घोटाला, EOW ने दर्ज की FIR!
धोखाधड़ी: बैंक को लगाया करोड़ों का चूना, 'लाभांशी मल्टीट्रेड' के डायरेक्टर और गारंटरों पर गिरी गाज।
EOW की बड़ी कार्रवाई: बिना बैंक की अनुमति के बेच दिया गिरवी रखा अनाज, 5 लोगों पर मामला दर्ज।
इंदौर से एक बड़ी खबर सामने आ रही है, जहाँ आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) ने करोड़ों रुपये के बैंक लोन घोटाले का पर्दाफाश किया है। 'मेसर्स लाभांशी मल्टीट्रेड प्राइवेट लिमिटेड' के डायरेक्टरों और गारंटरों ने मिलकर बैंक को करीब 22 करोड़ 88 लाख रुपये का चूना लगाया है। ईओडब्ल्यू इंदौर ने इस मामले में जालसाजी और गबन की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है।
[विस्तृत जानकारी - बॉडी]
पूरा मामला 'दि कॉसमॉस को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड' से जुड़ा है। जाँच में पाया गया कि साल 2019 में कंपनी के डायरेक्टरों ने मशीनरी खरीदने के नाम पर 2.50 करोड़ का टर्म लोन और 2.50 करोड़ की कैश क्रेडिट लिमिट हासिल की थी। लेकिन लालच यहीं नहीं रुका। साल 2020 और 2022 के बीच इस लिमिट को बढ़ाकर 21.50 करोड़ रुपये करवा लिया गया।
हैरानी की बात यह है कि आरोपियों ने बैंक के पास गिरवी रखे गए अनाज (जैसे चना और सोयाबीन) को बैंक को बिना बताए और बिना अनुमति के खुर्द-बुर्द कर दिया। यानी जो स्टॉक बैंक के पास बंधक था, उसे धोखाधड़ी से गायब कर दिया गया। फिलहाल बैंक का कुल बकाया 22,88,37,875/- रुपये है।
इस मामले में EOW ने जिन लोगों को आरोपी बनाया है, वे हैं:
मेसर्स लाभांशी मल्टीट्रेड प्रा.लि.
आयुष अग्रवाल (डायरेक्टर/गारंटर)
अनूप सिंघल (डायरेक्टर/गारंटर)
अंकुश सिंघल (गारंटर)
राजेन्द्र कुमार सिंघल (गारंटर)
ये सभी आरोपी धार जिले के नौगांव थाना क्षेत्र के निवासी बताए जा रहे हैं।
EOW इंदौर ने आरोपियों के खिलाफ प्रथम दृष्टया अपराध पाए जाने पर भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 409 (अमानत में ख्यानत), 420 (धोखाधड़ी) और 120-बी (आपराधिक साजिश) के तहत मामला पंजीबद्ध किया है।
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