नारायण नारायण प्रभु, मध्य प्रदेश के एक युवा और तेज़तर्रार पुलिस अधीक्षक अपनी कार्यप्रणाली के चलते आम जनता के बीच कम समय में ही खासे लोकप्रिय हो गए हैं। राजधानी भोपाल की सीमा से लगे जिले में हाल ही में पदस्थ हुए इन पुलिस अधीक्षक को लोग अब “बुलेट वाले एसपी” के नाम से भी संबोधित करने लगे हैं।
अब आप पूछेंगे प्रभु, कि भला उन्हें इस नाम से क्यों पुकारा जा रहा है? तो सुनिए इसके पीछे भी एक मज़ेदार किस्सा है।
दरअसल प्रभु, जिले की कमान संभालते ही इस युवा और जोशीले एसपी ने नगर के अवैध कारोबार करने वालों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। उन्होंने बिना लाव-लश्कर के, अकेले ही बुलेट पर सवार होकर शहर का भ्रमण शुरू कर दिया।
इसी दौरान उन्हें सूचना मिली कि नगर के एक इलाके में लंबे समय से खुलेआम अवैध शराब बेची जा रही है। सूचना की तस्दीक करने वे सादी वर्दी में अपनी बुलेट पर सवार होकर सीधे उस इलाके में जा पहुंचे। वहां उन्होंने खुद 240 रुपये में चार क्वार्टर अवैध शराब खरीदी। क्योंकि प्रभु, उन्हें जिले की कमान संभाले अभी कुछ ही दिन हुए थे, इसलिए अवैध शराब बेचने वाले उन्हें पहचान नहीं पाए। इसके बाद वे अपनी बुलेट से सीधे संबंधित थाने पहुंचे और थाना प्रभारी को वह अवैध शराब थमाते हुए उससे वही 240 रुपये वसूले — और फिर उसकी जमकर क्लास लगा दी।
इस घटना के बाद से ही स्थानीय लोग उन्हें “बुलेट वाले एसपी” के नाम से पुकारने लगे हैं।

*गृह मंत्री के पद पर नजर*

प्रभु, मध्य प्रदेश की धरती से एक और दिलचस्प खबर तेजी से फैल रही है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा आम है कि बड़बोलेपन और तीखे, विवादास्पद बयानों के लिए मशहूर सत्ताधारी दल के एक विधायक इन दिनों प्रदेश का गृहमंत्री बनने का सपना देख रहे हैं।
प्रभु, चर्चा तो यह भी है कि इन माननीय ने अपने निकटस्थ लोगों को भरोसा दिलाया है कि जल्द होने वाले मंत्रिमंडल के पुनर्गठन में उनका गृहमंत्री बनना तय है।
अब इन माननीय के इन दावों और चर्चाओं में कितनी सच्चाई है, यह तो प्रभु — आपसे बेहतर कौन जान सकता है। यह वही माननीय हैं जो लंबे समय से मंत्री बनने की आस लगाए बैठे हैं और इसके लिए साम, दाम, दंड, भेद — सबकी राजनीति में माहिर हैं।

*जिला सीईओ पर जनपद सीईओ भारी*

तो प्रभु, अब सुनिए जिले से एक और दिलचस्प खबर — एक जिला सीईओ और एक प्रभारी जनपद पंचायत महिला सीईओ के गठजोड़ की चर्चा पूरे जिले में जोरों पर है।
2018 बैच के यह युवा आईएएस अधिकारी जिस जिले में सीईओ हैं, वहीं पदस्थ महिला जनपद सीईओ के साथ उनका गठजोड़ अब पंचायत विभाग में चर्चा का विषय बना हुआ है।
सुनने में आया है कि सीधे भर्ती के यह सीईओ साहब स्वभाव से तो काफी अक्खड़ और तुनकमिज़ाज हैं, लेकिन महिला जनपद सीईओ के सामने उनकी यह सारी अकड़ और तुनक-मिज़ाजी जैसे गायब हो जाती है।
कहा जा रहा है प्रभु, कि प्रभारी जनपद सीईओ जो भी कह देती हैं — उसे यह सीईओ साहब पत्थर की लकीर मान लेते हैं। इसी वजह से अब पंचायत विभाग में इन दोनों के रिश्ते को लेकर चर्चाओं का बाज़ार गर्म है।
बरहाल प्रभु, आज के लिए इतना ही...
फिर लौटूंगा नई सुनी-सुनाई चर्चाओं के साथ।
अब चलता हूं — नारायण नारायण।

*— जुबेर कुरैशी*
 

न्यूज़ सोर्स : Naradmuni live